क्या है पूरा अपडेट
नई व्यवस्था के तहत हर ग्राम पंचायत/क्लस्टर स्तर पर प्रशिक्षित कृषि एडवाइज़र तैनात किए जा रहे हैं। ये UP Agriculture Advisor खेती से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान, फसल निरीक्षण, मिट्टी की जांच की सलाह, सही समय पर बुवाई-कटाई, सिंचाई प्रबंधन और रोग-कीट की शुरुआती पहचान में मदद करेंगे। सरकार का दावा है कि इससे किसानों की उत्पादन लागत घटेगी और पैदावार बढ़ेगी।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा
UP Agriculture Advisor किसानों को मौसम आधारित सलाह देंगे—कब सिंचाई करनी है, किस समय खाद डालनी है और कीटनाशक का सही उपयोग कैसे करना है। इससे बेवजह खर्च रुकेगा। साथ ही, ये फील्ड स्टाफ फसल बीमा, पीएम-किसान, पीएमएफबीवाई, बीज/उपकरण सब्सिडी जैसी योजनाओं की जानकारी भी देगा, ताकि किसान लाभ से वंचित न रहें।
मंडी और फसल कीमतों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के चलते मंडियों में किसानों को बेहतर भाव मिल सकते हैं। अभी कई जिलों में गलत ग्रेडिंग, नमी ज्यादा होने या रोगग्रस्त फसल के कारण किसानों को कम दाम मिलते हैं। कृषि एडवाइज़र कटाई से पहले फसल की तैयारी, सुखाने और भंडारण पर मार्गदर्शन देंगे, जिससे मंडी में क्वालिटी सुधरेगी और रेट पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
सरकारी योजनाओं से सीधा जुड़ाव
एडवाइज़र किसानों को सरकारी योजनाओं में आवेदन, दस्तावेज और समयसीमा समझाने में भी मदद करेंगे।UP Agriculture Advisor कई बार जानकारी के अभाव में किसान सब्सिडी या बीमा से बाहर रह जाते हैं। अब खेत पर ही उन्हें बताया जाएगा कि किस योजना में कब और कैसे आवेदन करना है। इससे DBT के जरिए सीधे खाते में लाभ मिलने की प्रक्रिया भी तेज होगी।
रोग-कीट और मौसम जोखिम पर खास फोकस
रबी सीजन में गेहूं, चना, सरसों जैसी फसलों में जड़ माहू, पत्ती झुलसा, इल्ली जैसे कीट-रोग का खतरा रहता है। एडवाइज़र शुरुआती लक्षण पहचानकर समय पर नियंत्रण की सलाह देंगे, जिससे बड़े नुकसान से बचा जा सके। बदलते मौसम में अचानक पाला, कोहरा या बारिश होने पर भी तुरंत अलर्ट दिया जाएगा।
तकनीक और आधुनिक खेती को बढ़ावा
सरकार की योजना ड्रोन स्प्रे, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मोबाइल-आधारित सलाह जैसी तकनीकों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की है। कृषि एडवाइज़र किसानों को बताएंगे कि कम पानी में अधिक उत्पादन, लाइन-सोइंग, संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक/एकीकृत खेती कैसे अपनाई जाए।
किसानों को अब क्या करना चाहिए
- अपने गांव/ब्लॉक के कृषि एडवाइज़र से संपर्क करें और अपनी फसल की स्थिति साझा करें।
- बुवाई, खाद-कीटनाशक और सिंचाई से पहले सलाह जरूर लें, ताकि खर्च कम हो।
- मंडी में बेचने से पहले कटाई, सुखाने और ग्रेडिंग की जानकारी लें।
- सभी सरकारी योजनाओं (पीएम-किसान, फसल बीमा, सब्सिडी) में समय पर आवेदन करें।
- खेतों की नियमित निगरानी करें और रोग-कीट के लक्षण दिखते ही एडवाइज़र को सूचित करें।
निष्कर्ष
UP Agriculture Advisor की तैनाती किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। सही सलाह, समय पर जानकारी और सरकारी योजनाओं तक आसान पहुंच से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर किसान इस सुविधा का सही उपयोग करते हैं, तो आने वाले सीजन में पैदावार, गुणवत्ता और मुनाफा—तीनों में सुधार संभव है।
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