प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर सोमनाथ मंदिर पहुंचकर इसे भारत की सभ्यता, साहस और आत्मगौरव का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ आकर उन्हें गहरा धन्य होने का अनुभव हुआ। यह पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान, सांस्कृतिक निरंतरता और ऐतिहासिक चेतना का उत्सव है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सनातन परंपरा और साहस का प्रतीक है। इतिहास गवाह है कि इस मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए, इसे तोड़ने के प्रयास किए गए, लेकिन हर बार सोमनाथ और भी अधिक मजबूती से खड़ा हुआ। यह मंदिर भारत की उस आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे दबाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल पत्थरों से बना मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है, जहां हर कण में आस्था और विश्वास समाया हुआ है।
सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यहां आकर उन्हें गहन शांति और गर्व की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि सोमनाथ भारत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है, जो देश को सदियों से दिशा देता आया है।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि उनकी गुजरात यात्रा की शुरुआत सोमनाथ से होना उनके लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह स्थल उन्हें राष्ट्र निर्माण के संकल्प की याद दिलाता है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन वर्ष 1026 में हुए पहले आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया जा रहा है। यह आयोजन उस ऐतिहासिक पीड़ा को स्मरण करने के साथ-साथ यह संदेश भी देता है कि भारत ने हर संकट से उबरकर खुद को और अधिक सशक्त बनाया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पर्व हमें अतीत से सीख लेकर भविष्य को मजबूत बनाने की प्रेरणा देता है। यह इतिहास को केवल याद करने का नहीं, बल्कि उससे आत्मबल लेने का अवसर है।
प्रधानमंत्री मोदी के सोमनाथ आगमन पर सड़कों के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग उनका स्वागत करने के लिए खड़े दिखाई दिए। लोग हाथों में तिरंगे और भगवा ध्वज लेकर प्रधानमंत्री का अभिनंदन कर रहे थे। कई स्थानों पर लोग घरों की छतों से भी प्रधानमंत्री को देखने और अभिवादन करने पहुंचे।
प्रधानमंत्री के काफिले के गुजरते समय ‘मोदी-मोदी’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इस दृश्य ने यह स्पष्ट कर दिया कि सोमनाथ केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि जनभावनाओं से गहराई से जुड़ा स्थल है।
प्रधानमंत्री ने श्री सोमनाथ ट्रस्ट के कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मंदिर के संरक्षण और विकास में ट्रस्ट की भूमिका सराहनीय रही है। आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्वरूप को बनाए रखना बड़ी उपलब्धि है।
सोमनाथ मंदिर आज न केवल तीर्थस्थल है, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय विकास का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ हमें सिखाता है कि चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न हों, भारत की आत्मा अडिग रहती है। यह स्थल आने वाली पीढ़ियों को साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता रहेगा।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के इतिहास, संस्कृति और आत्मसम्मान का उत्सव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश स्पष्ट है कि भारत अपनी जड़ों से जुड़कर ही भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ सकता है। सोमनाथ मंदिर आज भी यह साबित करता है कि आस्था और साहस के सामने कोई भी चुनौती टिक नहीं सकती।
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