गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने पशुपालन में सब्सिडी का बड़ा ऐलान किया है। माना जा रहा है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खेती के साथ-साथ डेयरी और पशुपालन भी कमाई का मजबूत जरिया बन सकता है सरकार का साफ संदेश है कि अब खेती सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं रहेगी। पशुपालन, बागवानी और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर मिलकर किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। यही वजह है कि इस बार बजट और नीतियों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को खास प्राथमिकता दी गई है।
क्या है पशुपालन में सब्सिडी का पूरा प्लान
सरकार का फोकस इस बात पर है कि ज्यादा से ज्यादा किसान पशुपालन को अपनाएं। इसके लिए गाय-भैंस, बकरी और पोल्ट्री फार्म खोलने पर आर्थिक मदद देने की तैयारी है। पशुपालन में सब्सिडी मिलने से शुरुआती खर्च का बोझ कम होगा, जो अक्सर किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होता है विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर छोटे किसान भी डेयरी या बकरी पालन शुरू करते हैं तो हर महीने एक तय आमदनी हो सकती है। यही स्थिर कमाई किसानों को कर्ज के जाल से बाहर निकालने में मदद कर सकती है सरकार आधुनिक डेयरी, कोल्ड स्टोरेज और पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर भी जोर दे रही है ताकि दूध और उससे जुड़े उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर हो सके। इससे घरेलू बाजार के साथ-साथ एक्सपोर्ट के मौके भी बढ़ेंगे।
अखरोट-बादाम की खेती पर खास जोर
पारंपरिक फसलों के अलावा अब ड्राई फ्रूट खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। खास तौर पर पहाड़ी और ठंडे इलाकों में अखरोट और बादाम की खेती को प्रोत्साहन देने की योजना है। सरकार चाहती है कि किसान ऐसी फसलों की ओर बढ़ें जिनकी बाजार में ज्यादा कीमत मिलती है कृषि जानकारों का कहना है कि ड्राई फ्रूट की डिमांड हर साल बढ़ रही है, लेकिन भारत अब भी बड़े पैमाने पर आयात करता है। अगर देश में उत्पादन बढ़ता है तो किसानों को फायदा होगा और आयात पर निर्भरता भी घटेगी नई योजनाओं के तहत पौधे, ट्रेनिंग और मार्केट तक पहुंच आसान बनाने पर काम किया जाएगा। इससे युवा किसान भी आधुनिक खेती की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।
फूड सेक्टर में निवेश से खुलेगा रोजगार का रास्ता
सरकार ने फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को भी प्राथमिकता दी है। लक्ष्य साफ है—खेती से लेकर पैकेजिंग तक पूरी चेन को मजबूत बनाना। जब गांवों के पास ही प्रोसेसिंग यूनिट लगेंगी तो किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा फूड सेक्टर में निवेश बढ़ने का सीधा असर रोजगार पर भी पड़ेगा। ग्रामीण इलाकों में नए प्लांट और छोटे उद्योग खुलने से स्थानीय लोगों को काम मिलेगा। इससे शहरों की ओर पलायन कम हो सकता है।
गांवों की अर्थव्यवस्था बदलने की तैयारी
सरकार की रणनीति अब “मल्टी-सोर्स इनकम” पर आधारित दिख रही है। यानी किसान सिर्फ गेहूं-धान पर निर्भर न रहें, बल्कि पशुपालन, फल-सब्जी और प्रोसेसिंग से भी कमाएं। इसी सोच के तहत पशुपालन में सब्सिडी को सबसे अहम कदम माना जा रहा है आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर योजनाएं सही तरीके से लागू हुईं तो ग्रामीण बाजार में खरीदारी बढ़ेगी, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
किसानों के लिए कितना फायदेमंद होगा यह फैसला
पहली नजर में ये ऐलान किसानों के लिए राहत भरे लगते हैं। सब्सिडी मिलने से जोखिम कम होगा और नई शुरुआत करना आसान बनेगा। हालांकि असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जमीन पर इन योजनाओं का क्रियान्वयन कितना तेज और पारदर्शी होता है फिलहाल इतना तय है कि पशुपालन में सब्सिडी, ड्राई फ्रूट खेती को बढ़ावा और फूड सेक्टर में निवेश—ये तीनों फैसले मिलकर खेती की तस्वीर बदल सकते हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो आने वाले सालों में गांव सिर्फ खेती के लिए नहीं बल्कि एग्री-बिजनेस के बड़े केंद्र के रूप में भी पहचाने जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार पैदा करने और ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस पर है कि ये ऐलान कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं।