तमिलनाडु Range Rover फैक्ट्री से पहली कार रोल-आउट, CM स्टालिन ने चलाई
Shubham Chaudhary February 17, 2026 0
भारत के ऑटो सेक्टर के लिए आज एक बड़ा दिन रहा। तमिलनाडु Range Rover फैक्ट्री से पहली लग्जरी SUV आधिकारिक तौर पर रोल-आउट हो गई है। खास बात यह रही कि इस ऐतिहासिक मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन खुद ड्राइविंग सीट पर नजर आए, जिसने इस पल को और भी यादगार बना दिया यह सिर्फ एक कार का रोल-आउट नहीं है, बल्कि “मेक इन इंडिया” को नई रफ्तार देने वाला कदम माना जा रहा है। लंबे समय से भारत में लग्जरी कारों के लोकल मैन्युफैक्चरिंग की बात हो रही थी, और अब तमिलनाडु Range Rover फैक्ट्री ने उस सपने को जमीन पर उतार दिया है।
CM स्टालिन ने संभाली स्टीयरिंग, दिया मजबूत संदेश
फैक्ट्री से पहली Range Rover निकलते ही माहौल उत्साह से भर गया। मुख्यमंत्री स्टालिन ने खुद स्टीयरिंग संभालकर यह साफ संदेश दिया कि तमिलनाडु अब सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं, बल्कि हाई-एंड ऑटोमोबाइल प्रोडक्शन का भी बड़ा केंद्र बनने जा रहा है अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट राज्य में रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ निवेश को भी आकर्षित करेगा। ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञ मानते हैं कि तमिलनाडु Range Rover फैक्ट्री आने वाले वर्षों में सप्लाई चेन, पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी तेजी से आगे बढ़ाएगी।
क्यों खास है तमिलनाडु Range Rover फैक्ट्री
यह फैक्ट्री कई मायनों में खास बताई जा रही है। यहां आधुनिक रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया गया है ताकि इंटरनेशनल क्वालिटी बरकरार रखी जा सके। कंपनी का लक्ष्य है कि भारत में बनी Range Rover सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि एक्सपोर्ट भी बढ़ाया जाए ऑटो मार्केट के जानकारों का कहना है कि लोकल प्रोडक्शन शुरू होने से कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इंपोर्ट ड्यूटी कम होने से भविष्य में ग्राहकों को लग्जरी SUV थोड़ी ज्यादा किफायती मिल सकती है।
भारत बनेगा लग्जरी कार मैन्युफैक्चरिंग का नया हब?
पिछले कुछ सालों में तमिलनाडु ने खुद को ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित किया है। बड़ी-बड़ी कंपनियां यहां पहले से प्लांट चला रही हैं। ऐसे में तमिलनाडु Range Rover फैक्ट्री का शुरू होना इस बात का संकेत है कि भारत अब सिर्फ छोटे और मिड-सेगमेंट वाहनों तक सीमित नहीं रहना चाहता विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इसी तरह निवेश आता रहा तो भारत एशिया में लग्जरी कार प्रोडक्शन का बड़ा हब बन सकता है। इससे न सिर्फ तकनीक आएगी बल्कि स्किल डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा।
रोजगार और लोकल इकॉनमी को मिलेगा बूस्ट
नई फैक्ट्री का सबसे बड़ा फायदा रोजगार के रूप में देखने को मिलेगा। सीधे तौर पर हजारों नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, सप्लायर और सर्विस सेक्टर को भी फायदा होगा स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि इससे आसपास के इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित होगा। सड़क, वेयरहाउस और सपोर्ट इंडस्ट्री के विस्तार से पूरी लोकल इकॉनमी को मजबूती मिलेगी।
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
कार प्रेमियों के लिए यह खबर बेहद उत्साहजनक है। भारत में बनने वाली Range Rover का मतलब है कम वेटिंग पीरियड और बेहतर सर्विस सपोर्ट। साथ ही, कंपनी भारतीय सड़कों और मौसम को ध्यान में रखकर कुछ फीचर्स में बदलाव भी कर सकती है हालांकि अभी कीमतों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट मानते हैं कि लोकल असेंबली से कुल लागत पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
भारत की ऑटो कहानी में नया अध्याय
कुल मिलाकर, तमिलनाडु Range Rover फैक्ट्री सिर्फ एक औद्योगिक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत की बदलती आर्थिक ताकत का संकेत है। यह दिखाता है कि देश अब ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग मैप पर तेजी से अपनी जगह बना रहा है मुख्यमंत्री स्टालिन का खुद स्टीयरिंग संभालना एक प्रतीकात्मक तस्वीर जरूर है, लेकिन इसका संदेश साफ है भारत अब लग्जरी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले समय में यह कदम ऑटो सेक्टर की दिशा और गति दोनों तय कर सकता है।
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