Stock Market Crash ने एक बार फिर निवेशकों की नींद उड़ा दी है। हफ्ते की शुरुआत ही बड़े झटके के साथ हुई जब सेंसेक्स करीब 1000 अंक तक टूट गया और देखते ही देखते लगभग 7 लाख करोड़ रुपये बाजार से साफ हो गए। सुबह बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि निवेशकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला टीवी स्क्रीन पर लाल निशान और गिरते ग्राफ ने साफ संकेत दे दिया कि बाजार में घबराहट का माहौल है। छोटे निवेशक सबसे ज्यादा परेशान दिखे, क्योंकि कई लोगों की महीनों की कमाई कुछ घंटों में ही घट गई।
क्यों आया इतना बड़ा Stock Market Crash
विशेषज्ञों का कहना है कि इस Stock Market Crash के पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं। सबसे बड़ा कारण ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेत माने जा रहे हैं। अमेरिका और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ा इसके अलावा बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने आग में घी डालने का काम किया। जब बड़े फंड पैसा निकालते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ना तय होता है कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और दुनिया भर में चल रहे आर्थिक तनाव ने भी माहौल को नकारात्मक बना दिया। यही वजह रही कि आईटी, बैंकिंग और मेटल जैसे बड़े सेक्टरों में भारी गिरावट देखने को मिली।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
आज की गिरावट सिर्फ एक-दो कंपनियों तक सीमित नहीं रही। बाजार के दिग्गज शेयर भी बिकवाली की चपेट में आ गए। बैंकिंग शेयरों में तेज गिरावट से इंडेक्स पर सीधा असर पड़ा, जबकि टेक कंपनियों के शेयर भी दबाव में नजर आए मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की हालत तो और खराब रही। कई शेयर 5 से 10 प्रतिशत तक फिसल गए। इससे साफ दिखा कि डर सिर्फ बड़े निवेशकों में नहीं बल्कि रिटेल निवेशकों में भी फैल चुका है।
निवेशकों में डर या मौका
हर Stock Market Crash अपने साथ डर जरूर लाता है, लेकिन अनुभवी निवेशक इसे मौके की तरह भी देखते हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि घबराकर फैसले लेना सबसे बड़ी गलती हो सकती है अगर किसी कंपनी के फंडामेंटल मजबूत हैं तो सिर्फ गिरावट देखकर शेयर बेच देना समझदारी नहीं है। इतिहास गवाह है कि बड़ी गिरावट के बाद बाजार अक्सर रिकवर करता है। हालांकि यह भी सच है कि शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बिना सोचे-समझे पैसा न लगाएं और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही निवेश करें।
क्या आगे और गिर सकता है बाजार
यह सवाल इस समय हर निवेशक के मन में है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक ग्लोबल संकेत स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है। यानी तेजी और गिरावट दोनों का दौर देखने को मिल सकता है हालांकि कुछ जानकार इसे हेल्दी करेक्शन भी बता रहे हैं। उनके मुताबिक, लंबे समय से बाजार लगातार ऊपर जा रहा था, ऐसे में थोड़ी गिरावट जरूरी थी ताकि वैल्यूएशन संतुलित हो सके।
छोटे निवेशक क्या करें
सबसे जरूरी है कि अफवाहों से दूर रहें। सोशल मीडिया या दोस्तों की सलाह पर तुरंत फैसले लेना नुकसान करा सकता है। अगर आप लंबे समय के निवेशक हैं तो बार-बार पोर्टफोलियो चेक करने से बचें डाइवर्सिफिकेशन यानी अलग-अलग सेक्टर में निवेश करना जोखिम कम करने का अच्छा तरीका माना जाता है। साथ ही, एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है।
बाजार का मूड कब बदलेगा
बाजार हमेशा भावनाओं पर चलता है डर और लालच दोनों पर। फिलहाल डर हावी है, लेकिन जैसे ही सकारात्मक खबरें आएंगी, माहौल बदल सकता है। विदेशी निवेश की वापसी, महंगाई पर नियंत्रण और मजबूत आर्थिक डेटा बाजार को सहारा दे सकते हैं फिलहाल इतना तय है कि Stock Market Crash ने निवेशकों को सावधान जरूर कर दिया है। यह गिरावट एक याद दिलाती है कि शेयर बाजार में जोखिम हमेशा रहता है, लेकिन सही रणनीति और धैर्य रखने वाले निवेशक ही लंबे समय में जीतते हैं।
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