Budget 2026: सस्ती EV का रास्ता साफ, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बूस्ट, ड्यूटी छूट से बदलेगा ऑटो सेक्टर
Shubham Chaudhary February 3, 2026 0
Budget 2026 में सस्ती EV को लेकर सरकार ने ऐसे संकेत दिए हैं, जो आने वाले समय में आम लोगों के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदना आसान बना सकते हैं। बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, सीएनजी ब्लेंडिंग पर जोर और ड्यूटी में छूट इन तीन फैसलों को ऑटो सेक्टर के लिए गेमचेंजर माना जा रहा हैसरकार का साफ संदेश है कि भारत को क्लीन मोबिलिटी की तरफ तेजी से बढ़ाना है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चलता है, तो जल्द ही पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के मुकाबले सस्ती EV एक मजबूत विकल्प बन सकती है।
सस्ती EV पर सरकार का बड़ा फोकस
इस बार बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर खास ध्यान दिया गया है। सरकार चाहती है कि गाड़ियों की कीमत कम हो, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक विकल्प अपनाएं एक बड़ा कदम इंपोर्ट ड्यूटी में छूट को लेकर है। बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ जरूरी कच्चे माल पर टैक्स कम करने का रास्ता खोला गया है। इसका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर पड़ेगा और कंपनियां कम कीमत में गाड़ियां बाजार में ला सकेंगी विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर बैटरी सस्ती होती है, तो सस्ती EV का सपना तेजी से हकीकत बन सकता है, क्योंकि किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी की कुल कीमत में बैटरी का हिस्सा सबसे ज्यादा होता है।
बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बूस्ट
भारत अभी बैटरियों के मामले में काफी हद तक आयात पर निर्भर है। लेकिन बजट में लोकल प्रोडक्शन बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि देश में ही बड़े स्तर पर बैटरी तैयार हो, जिससे सप्लाई मजबूत हो और कीमतों में स्थिरता आए ड्यूटी छूट के साथ-साथ नई फैक्ट्रियों को बढ़ावा देने की बात भी सामने आई है। इससे निवेश बढ़ सकता है और रोजगार के नए मौके बन सकते हैं ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का कहना है कि जब देश में बैटरी बनेगी, तब लॉन्ग टर्म में सस्ती EV बाजार में उतारना कंपनियों के लिए ज्यादा आसान होगा।
सीएनजी ब्लेंडिंग पर भी जोर
इलेक्ट्रिक के साथ-साथ सरकार ने ट्रांजिशन फ्यूल पर भी ध्यान दिया है। सीएनजी ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने की तैयारी है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।यह कदम खासतौर पर उन लोगों के लिए अहम माना जा रहा है, जो तुरंत इलेक्ट्रिक गाड़ी नहीं खरीद सकते। यानी सरकार एक साथ कई विकल्प तैयार कर रही है, ताकि क्लीन एनर्जी की तरफ बदलाव धीरे-धीरे लेकिन मजबूत तरीके से हो।
ऑटो सेक्टर को मिल सकता है नया बूस्ट
बजट के इन संकेतों से ऑटो कंपनियों के लिए भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं। लागत घटेगी तो कंपनियां नए मॉडल लॉन्च करने में ज्यादा आक्रामक हो सकती हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ सालों में एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कारों की संख्या बढ़ेगी। यही वह सेगमेंट है, जहां सस्ती EV सबसे ज्यादा असर दिखा सकती है।इसके अलावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी सरकार का फोकस जारी रहने की उम्मीद है। क्योंकि जब तक चार्जिंग आसान नहीं होगी, तब तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रफ्तार सीमित रह सकती है।
आम आदमी को क्या फायदा होगा?
अगर बजट के बाद नीतियां तेजी से लागू होती हैं, तो सबसे बड़ा फायदा आम ग्राहकों को मिल सकता है। कम कीमत, कम रनिंग कॉस्ट और मेंटेनेंस में बचत—ये तीन कारण पहले ही लोगों को इलेक्ट्रिक की तरफ खींच रहे हैं ऊपर से अगर शुरुआती कीमत भी कम हो जाती है, तो मिडिल क्लास के लिए सस्ती EV खरीदना ज्यादा संभव हो जाएगा हालांकि, एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि असर दिखने में थोड़ा वक्त लग सकता है। मैन्युफैक्चरिंग सेटअप, सप्लाई चेन और मार्केट तैयार होने में समय लगता है।
क्या भारत बन सकता है EV हब?
सरकार की रणनीति सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं दिखती। लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाकर भारत को ग्लोबल EV सप्लाई चेन में मजबूत खिलाड़ी बनाने की कोशिश है अगर निवेश बढ़ता है और टेक्नोलॉजी भारत आती है, तो आने वाले वर्षों में देश EV प्रोडक्शन का बड़ा केंद्र बन सकता है फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि Budget 2026 ने दिशा साफ कर दी है—फोकस क्लीन मोबिलिटी पर है और लक्ष्य है ज्यादा से ज्यादा सस्ती EV सड़कों पर लाना। अब नजर इस बात पर रहेगी कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं।
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