Rabi Crop Alert 2026: वैज्ञानिक खेती अपनाओ! मंत्री बोले- नई तकनीक से फसल उत्पादन और पानी की बचत संभव
Rabi Crop Alert 2026: कृषि मंत्री ने आज एक अहम बैठक में किसानों को चेतावनी दी है कि इस रबी सीजन में फसलों की उर्वरता और पैदावार को बचाने के लिए वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम, कीट-रोगों के बढ़ते प्रकोप और सिंचाई के दबाव को ध्यान में रखते हुए किसानों को नए कृषि उपकरण, रोग-निरोधक बीज तथा वैज्ञानिक तरीके अपनाने होंगे ताकि उत्पादन में नुकसान न हो और पानी की बचत भी हो सके। यह अलर्ट खासकर गेहूं, चना और सरसों किसानों के लिए है जो रबी सीजन में आगे बढ़ रहे हैं।
किसानों पर प्रभाव
इस रबी मौसम में मौसम में उतार-चढ़ाव और कीट-व्याधि की समस्या सामने आ रही है, जिससे फसलों के बढ़ते समय रोग-प्रकोप का खतरा बना हुआ है।Rabi Crop Alert कृषि वैज्ञानिकों ने चेताया है कि उकठा रोग जैसे कवक-जनित रोग चने की फसल को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे पौधों की पत्तियों का पीला पड़ना और पौधे का कमजोर होना जैसी समस्याएं दिख सकती हैं। ऐसे रोगों के प्रसार को रोकने के लिए समय पर खाली/रोगग्रस्त पौधों को हटाना और जैविक/रसायनिक नियंत्रण तकनीकों का प्रयोग जरूरी है।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार रबी फसलों का बोआई कुल मिलाकर पिछले साल की तुलना में बढ़ा है, लेकिन रोग-कीट विशेषकर चने, गेहूं और सरसों के खेतों में किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अगर समय रहते रोकथाम न की गई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा
वैज्ञानिक उपाय और तकनीकी सुझाव
Rabi Crop Alert कृषि मंत्री के निर्देश के अनुसार किसानों को निम्न वैज्ञानिक उपाय अपनाने चाहिए:
- उन्नत, रोग-प्रतिरोधक बीजों का चयन: मौसम और मिट्टी के अनुसार प्रमाणित बीज लें।
- मृदा परीक्षण: खेत की मिट्टी की जाँच कर पोषक तत्वों की कमी के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें।
- नई तकनीकें अपनाना: ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई, मल्चिंग, और स्मार्ट कृषि उपकरण जैसे सेंसर-आधारित जल प्रबंधन अपनाएं।
- रोग-निरोधी उपाय: जैविक उपायों के साथ सही समय पर फफूंदनाशी/कीटनाशक का छिड़काव करना।
- खेती बीमा का लाभ उठाना: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत रबी फसलों का बीमा कराएं ताकि प्राकृतिक आपदा/रोग-कीट के कारण नुकसान को कवर किया जा सके।
किसानों को क्या करना चाहिए?
किसानों को चाहिए कि वे खेतों की नियमित निगरानी करें और सबसे पहले बीमार पौधों की पहचान करें। रोग-लक्षण दिखते ही स्थानीय कृषि अधिकारियों से सलाह लें और बिना परामर्श के रसायन का उपयोग न करें। मौसम विभाग के अलर्ट और स्थानीय Rabi Crop Alert कृषि विभाग की गाइडलाइन को गंभीरता से लें। साथ ही, खेत के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन को बढ़ाने और पानी की बचत सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाएँ, जिससे आने वाली फसल एक सुरक्षित और लाभदायक सीज़न साबित हो सके।
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