सोचिए आप कार में बैठे हैं, दरवाजे लॉक हैं, बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं और कुछ ही मिनटों में सांस लेना मुश्किल होने लगे। यह किसी फिल्म का सीन नहीं, बल्कि हकीकत बनता जा रहा है। Hidden Killer Feature को लेकर चीन ने सख्त कदम उठाया है और अब भारत में भी इस पर बहस तेज हो गई है पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए जहां लोग कार के अंदर फंस गए। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फेल हुआ, ऑटो लॉक खुला नहीं और देखते ही देखते हालत गंभीर हो गई। यही वजह है कि इस Hidden Killer Feature को अब “चलती-फिरती खतरे की घंटी” कहा जा रहा है।
क्या है ‘Hidden Killer Feature’ और क्यों है खतरनाक
यह फीचर असल में आधुनिक कारों के एडवांस सेफ्टी और ऑटोमेशन सिस्टम का हिस्सा है। कई नई गाड़ियों में इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक, फ्लश डोर हैंडल, और पूरी तरह डिजिटल कंट्रोल दिए जा रहे हैं। यानी अगर बैटरी बैठ जाए या सिस्टम क्रैश हो जाए, तो दरवाजे खोलना आसान नहीं रहता समस्या तब बढ़ती है जब कार अंदर से भी तुरंत नहीं खुलती। एक्सीडेंट या आग जैसी स्थिति में सेकंड की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि टेक्नोलॉजी सुविधा तो दे रही है, लेकिन इमरजेंसी के वक्त यही Hidden Killer Feature लोगों को कार में कैद कर सकता है।
चीन ने क्यों लगाया बैन?
चीन में इलेक्ट्रिक और हाई-टेक कारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इसी के साथ हादसों की खबरें भी बढ़ीं। कुछ मामलों में दुर्घटना के बाद लोग कार से बाहर नहीं निकल पाए क्योंकि दरवाजे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर निर्भर थे रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच में पाया गया कि मैनुअल बैकअप सिस्टम कई गाड़ियों में या तो मुश्किल था या यूजर को उसकी जानकारी ही नहीं थी। इसके बाद अधिकारियों ने ऑटो कंपनियों को साफ निर्देश दिए ऐसे Hidden Killer Feature पर रोक लगाओ या मजबूत मैनुअल विकल्प दो यह फैसला सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। अब कंपनियों को डिजाइन बदलने और आसान इमरजेंसी एग्जिट देने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत में क्यों बढ़ रही चिंता
भारत में भी कार बाजार तेजी से बदल रहा है। लोग स्मार्ट फीचर्स वाली गाड़ियां पसंद कर रहे हैं कीलेस एंट्री, ऑटो लॉक, सेंसर बेस्ड हैंडल और फुल डिजिटल कंट्रोल। लेकिन सवाल वही हैअगर सिस्टम फेल हो जाए तो क्या होगा ऑटो एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत में अभी इस Hidden Killer Feature पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई है, लेकिन खतरा यहां भी उतना ही असली है। खासकर गर्मियों में, जब बंद कार कुछ ही मिनटों में ओवन जैसी गर्म हो जाती है नेशनल रोड सेफ्टी से जुड़े जानकार कहते हैं कि गाड़ियों में टेक्नोलॉजी लाते वक्त “फेल-सेफ सिस्टम” होना जरूरी है। यानी अगर इलेक्ट्रॉनिक्स काम न करें, तब भी दरवाजा आसानी से खुल सके।
कंपनियों और सरकार को क्या करना चाहिए
विशेषज्ञों का साफ कहना है सेफ्टी फीचर ऐसा होना चाहिए जो हर उम्र का व्यक्ति बिना सोचे इस्तेमाल कर सके। इमरजेंसी लीवर छिपा हुआ नहीं, बल्कि साफ दिखना चाहिए। साथ ही ग्राहकों को कार खरीदते वक्त इसकी जानकारी भी दी जानी चाहिए सरकार के स्तर पर भी नियम सख्त करने की मांग उठ रही है। जैसे एयरबैग और ABS अनिवार्य किए गए, वैसे ही इमरजेंसी डोर सिस्टम को लेकर गाइडलाइन बनाई जा सकती है। क्योंकि टेक्नोलॉजी तभी फायदेमंद है जब वह जान बचाए, न कि जोखिम बढ़ाए।
स्मार्ट कार या स्मार्ट खतरा
सवाल यह नहीं कि टेक्नोलॉजी गलत है। सवाल यह है कि क्या हम पूरी तरह उस पर निर्भर हो सकते हैं? Hidden Killer Feature हमें याद दिलाता है कि हर स्मार्ट चीज सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं कार खरीदते वक्त अब सिर्फ माइलेज और टचस्क्रीन नहीं, बल्कि इमरजेंसी एग्जिट भी देखना होगा। क्योंकि एक छोटा सा फीचर, जिसे हम नजरअंदाज कर देते हैं, वही मुश्किल वक्त में जिंदगी और मौत का फर्क बना सकता है चीन का फैसला एक चेतावनी की तरह है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो भारत में भी यह मुद्दा बड़ा बन सकता है.