देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भविष्य माना जा रहा है, लेकिन EV Fire के ताज़ा आंकड़ों ने इस भरोसे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है, वह चौंकाने वाला भी है और सोचने पर मजबूर करने वाला भी पिछले तीन सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े कुल 23,865 हादसे दर्ज किए गए हैं। इनमें 26 ऐसे मामले भी सामने आए, जहां गाड़ियों में आग लग गई। ये आंकड़े सामने आते ही इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे लोगों और मौजूदा मालिकों दोनों की चिंता बढ़ गई है।
EV Fire पर सरकारी आंकड़ों ने क्यों बढ़ाई टेंशन
सरकारी डेटा बताता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ ही हादसों की खबरें भी बढ़ी हैं। हालांकि कुल वाहनों की तुलना में आग लगने के मामले कम हैं, लेकिन जब भी EV Fire की घटना होती है, वह चर्चा का बड़ा विषय बन जाती है विशेषज्ञों के मुताबिक, इलेक्ट्रिक गाड़ियों में आग लगने का सबसे बड़ा कारण बैटरी से जुड़ी समस्या हो सकती है। लिथियम-आयन बैटरियां अगर ज्यादा गर्म हो जाएं या उनमें मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट हो, तो आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार ओवरचार्जिंग या गलत चार्जर का इस्तेमाल भी जोखिम पैदा करता है सरकार ने यह भी साफ किया है कि हर हादसा सिर्फ तकनीकी खराबी की वजह से नहीं होता। कुछ मामलों में सड़क दुर्घटना के बाद बैटरी डैमेज होने से आग लगी।
क्या इलेक्ट्रिक कारें वाकई सुरक्षित हैं
यह सवाल अब आम लोगों के मन में तेजी से उठ रहा है। ऑटो एक्सपर्ट मानते हैं कि नई तकनीक के साथ शुरुआत में चुनौतियां आती हैं। पेट्रोल और डीजल गाड़ियों में भी पहले आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं फिर भी EV Fire की घटनाएं इसलिए ज्यादा डर पैदा करती हैं क्योंकि बैटरी में लगी आग को बुझाना आसान नहीं होता। एक बार आग भड़क जाए तो उसे कंट्रोल करने में ज्यादा समय और खास उपकरण लगते हैं हालांकि कंपनियां लगातार बैटरी सेफ्टी पर काम कर रही हैं। नई इलेक्ट्रिक कारों में थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक कट-ऑफ और एडवांस सेंसर जैसे फीचर्स दिए जा रहे हैं ताकि खतरे को कम किया जा सके।
सरकार और कंपनियां क्या कदम उठा रही हैं
बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार ने सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को और सख्त करने के संकेत दिए हैं। बैटरी टेस्टिंग, क्वालिटी चेक और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है ऑटो कंपनियां भी सतर्क हो गई हैं। कई कंपनियों ने पहले बैच की गाड़ियों को रिकॉल कर बैटरी अपडेट किए थे। इसके अलावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गाड़ी को हमेशा ऑथराइज्ड चार्जिंग स्टेशन या कंपनी के चार्जर से ही चार्ज करें। लोकल या सस्ते उपकरण इस्तेमाल करने से EV Fire का खतरा बढ़ सकता है।
क्या इन आंकड़ों से EV का भविष्य प्रभावित होगा
भारत समेत पूरी दुनिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ बढ़ रही है। प्रदूषण कम करने और ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए EV को जरूरी माना जा रहा है। ऐसे में कुछ घटनाएं इस रफ्तार को धीमा जरूर कर सकती हैं, लेकिन रोक नहीं सकतीं जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे तकनीक बेहतर होगी, वैसे-वैसे सुरक्षा भी बढ़ेगी। शुरुआती दौर में आंकड़े डराते जरूर हैं, लेकिन लंबी अवधि में इलेक्ट्रिक गाड़ियां और भरोसेमंद हो सकती हैं फिलहाल, EV Fire के इन मामलों ने एक बात साफ कर दी है नई तकनीक अपनाते समय जागरूक रहना बेहद जरूरी है। अगर सेफ्टी गाइडलाइंस का पालन किया जाए और सही तरीके से गाड़ी का इस्तेमाल हो, तो जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सफर अभी शुरू ही हुआ है। लेकिन सवाल वही है क्या लोग इन आंकड़ों के बाद भी उतने ही भरोसे के साथ EV अपनाएंगे, या सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन जाएगा? आने वाला समय इसका जवाब देगा।
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