AI Hallucination आज टेक दुनिया का सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गलत जानकारी दे सकता है, तब भी लोग उस पर इतना भरोसा क्यों कर रहे हैं? इसी मुद्दे पर India Today AI Summit में Wipro की VP ने खुलकर बात की और बताया कि आखिर कंपनियां और यूजर्स इस जोखिम के बावजूद AI को अपनाने से पीछे क्यों नहीं हट रहे पहले AI को सिर्फ एक स्मार्ट टूल माना जाता था, लेकिन अब यह फैसले लेने से लेकर बिजनेस चलाने तक में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में AI Hallucination का खतरा जितना बड़ा है, उतनी ही तेजी से इसका इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
सीधी भाषा में समझें तो जब AI बिना सही डेटा के भी आत्मविश्वास से गलत जवाब दे देता है, उसे AI Hallucination कहा जाता है। यानी मशीन को लगता है कि वह सही है, लेकिन असल में जानकारी गलत होती है Wipro की VP ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है, लेकिन अब इसका असर ज्यादा दिखने लगा है क्योंकि AI का इस्तेमाल हेल्थकेयर, बैंकिंग, एजुकेशन और सरकारी कामों तक पहुंच चुका है। अगर यहां गलती हुई, तो उसका असर भी बड़ा होगा उन्होंने यह भी कहा कि AI को पूरी तरह परफेक्ट मानना सबसे बड़ी भूल है। AI एक सहायक है, इंसान का विकल्प नहीं।
यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। VP के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह है स्पीड और प्रोडक्टिविटी। AI कुछ सेकंड में वह काम कर देता है, जिसमें इंसानों को घंटों लग सकते हैं कंपनियां मानती हैं कि अगर AI Hallucination का जोखिम है भी, तो सही मॉनिटरिंग और ह्यूमन चेक से उसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। यानी AI अकेले नहीं, बल्कि इंसानों के साथ मिलकर ज्यादा बेहतर काम करता है उन्होंने एक दिलचस्प बात कही लोग AI पर आंख बंद करके भरोसा नहीं कर रहे, बल्कि समझदारी से उसका इस्तेमाल सीख रहे हैं।”
अब ज्यादातर कंपनियां “Trust but Verify” मॉडल अपना रही हैं। मतलब AI से काम लो, लेकिन आखिरी फैसला इंसान करे VP ने बताया कि भविष्य में AI टूल्स को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वे अपने जवाब के साथ सोर्स और लॉजिक भी दिखाएं। इससे AI Hallucination की संभावना कम होगी और यूजर को भरोसा भी मिलेगा इसके अलावा कंपनियां AI मॉडल को लगातार ट्रेन कर रही हैं ताकि गलतियों की संख्या घटे।
समिट में यह चिंता भी सामने आई कि कहीं लोग सोचने की आदत तो नहीं छोड़ रहे। आसान जवाब मिलने की वजह से कई बार लोग खुद जांचना बंद कर देते हैं इस पर VP ने साफ कहा कि AI का सही इस्तेमाल तभी है जब उसे “को-पायलट” की तरह इस्तेमाल किया जाए, “ऑटो-पायलट” की तरह नहीं। यानी AI रास्ता दिखा सकता है, लेकिन ड्राइविंग इंसान को ही करनी होगी AI Hallucination हमें यही याद दिलाता है कि टेक्नोलॉजी कितनी भी एडवांस क्यों न हो, अंतिम जिम्मेदारी इंसान की ही है।
भारत तेजी से AI अपनाने वाले देशों में शामिल हो चुका है। स्टार्टअप से लेकर बड़ी IT कंपनियां तक AI में निवेश बढ़ा रही हैं VP के मुताबिक, भारत के पास टैलेंट भी है और डेटा भी, इसलिए यहां AI का भविष्य मजबूत दिखता है। लेकिन साथ ही जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है कि AI Hallucination जैसी चुनौतियों को नजरअंदाज न किया जाए उन्होंने जोर देकर कहा कि सही गाइडलाइन, रेगुलेशन और ट्रांसपेरेंसी से AI को ज्यादा भरोसेमंद बनाया जा सकता है।
एक बात साफ है AI रुकने वाला नहीं है। आने वाले समय में यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाएगा। सवाल यह नहीं है कि AI पर भरोसा करना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि कैसे और कितना भरोसा करना चाहिए AI Hallucination एक चेतावनी जरूर है, लेकिन यह AI की ताकत को कम नहीं करता। सही बैलेंस, ह्यूमन निगरानी और बेहतर टेक्नोलॉजी के साथ AI न सिर्फ तेज बल्कि सुरक्षित भी बन सकता है।
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