पैचवर्क की खुली पोल! 3 दिन में उखड़ी सड़क, जीटी रोड पर बढ़ा हादसों का खतरा

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कानपुर की जीटी रोड पर यूनिवर्सिटी से कल्याणपुर के बीच किए गए पैचवर्क ने एक बार फिर नगर निगम और निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर गड्ढे भरने के महज तीन दिन बाद ही गिट्टियां बाहर निकलने लगी हैं। नतीजा यह है कि वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और हादसों की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।

पैचवर्क के बाद भी नहीं सुधरी सड़क की हालत

स्थानीय लोगों के अनुसार, यूनिवर्सिटी से कल्याणपुर के बीच सड़क पहले से ही बदहाल थी। जगह-जगह गड्ढों के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को रोजाना जोखिम उठाना पड़ता था। शिकायतों के बाद पीडब्ल्यूडी एनएच ने तीन दिन पहले गड्ढे भरने का काम कराया, लेकिन अगली ही सुबह से सड़क की परत उखड़ने लगी। गिट्टियां बाहर आने से सड़क और भी खतरनाक हो गई है।

रात का तापमान और घटिया सामग्री बनी वजह

अधिकारियों का कहना है कि रात के समय तापमान काफी कम होने के कारण डामर सड़क पर ठीक से जम नहीं पाया। ठंड के कारण गर्म बिटुमिन भी सही तरीके से चिपक नहीं सका, जिससे पैचवर्क टिक नहीं पाया। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि समस्या केवल मौसम की नहीं, बल्कि घटिया सामग्री और जल्दबाजी में किए गए काम की भी है।

रात का तापमान और घटिया सामग्री बनी वजह

अधिकारियों का कहना है कि रात के समय तापमान काफी कम होने के कारण डामर सड़क पर ठीक से जम नहीं पाया। ठंड के कारण गर्म बिटुमिन भी सही तरीके से चिपक नहीं सका, जिससे पैचवर्क टिक नहीं पाया। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि समस्या केवल मौसम की नहीं, बल्कि घटिया सामग्री और जल्दबाजी में किए गए काम की भी है।

हादसों की बढ़ती संख्या

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, गिट्टियां बाहर आने के बाद कई दोपहिया वाहन सवार गिर चुके हैं। हालांकि बड़े हादसे टल गए, लेकिन रोजाना छोटे हादसे हो रहे हैं। रात के समय सड़क पर बिखरी गिट्टियां दिखाई नहीं देतीं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

हादसों की बढ़ती संख्या

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, गिट्टियां बाहर आने के बाद कई दोपहिया वाहन सवार गिर चुके हैं। हालांकि बड़े हादसे टल गए, लेकिन रोजाना छोटे हादसे हो रहे हैं। रात के समय सड़क पर बिखरी गिट्टियां दिखाई नहीं देतीं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

नागरिकों का गुस्सा और सवाल

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब मौसम की जानकारी पहले से होती है तो ऐसे समय में पैचवर्क क्यों कराया गया। उनका कहना है कि हर बार अस्थायी मरम्मत कर दी जाती है, जो कुछ दिनों में ही उखड़ जाती है। इससे न सिर्फ सरकारी पैसे की बर्बादी होती है, बल्कि आम जनता की जान भी जोखिम में पड़ जाती है।

स्थायी समाधान की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार पैचवर्क करने के बजाय सड़क की स्थायी मरम्मत जरूरी है। सही तापमान, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और उचित तकनीक के बिना किया गया काम लंबे समय तक नहीं टिक सकता। यदि प्रशासन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाता, तो जीटी रोड पर यह समस्या हर मौसम में दोहराई जाती रहेगी।

निष्कर्ष

यूनिवर्सिटी से कल्याणपुर के बीच जीटी रोड पर उखड़ी गिट्टियों ने सिस्टम की लापरवाही को उजागर कर दिया है। तीन दिन में ही पैचवर्क का उखड़ जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है कि प्रशासन अस्थायी उपायों से आगे बढ़कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए, ताकि सड़कें सुरक्षित हों और आम लोगों को रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर न करना पड़े।

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